वर्ष (Vol.) - 9, अंक (Issue) -2
अनुक्रमणिका
संपादकीय
बंगाल की लोक नृत्य परंपरा एवं स्वरूप
नेहा झा एवं विष्णु कुमार – पृ. 05–12
बाल कहानियों के बदलते क्षितिज
डॉ. ईश्वर पवार – पृ. 13–18
‘जब आदिवासी गाता है’: आदिवासी समाज की सांस्कृतिक प्रतिध्वनि
डॉ. अभिषेक कुमार यादव – पृ. 19–23
The Celebration of Nature in the Fictional World
Anita Alda – पृ. 24–28
हिंदी कहानियों में अभिव्यक्त विकलांगों की दशा
अमित कुमार चौबे – पृ. 29–33
दहेज प्रथा एवं नारी जीवन: एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
(हरिद्वार जिले के विशेष सन्दर्भ में)
वंदना सिंह एवं डॉ. सुषमा नयाल – पृ. 34–44
मुसहर समुदाय में समकालीन सामाजिक समस्याएँ
चाँदनी – पृ. 45–53
हिंदी उपन्यासों में वर्णित झारखंड के आदिवासियों का जीवन
जीवेश कुमार झा – पृ. 54–56
नई कहानी: विकास एवं संवेदना
डॉ. बिनय कुमार सिन्हा – पृ. 57–60
आदिवासी प्रतिरोध का प्रकृत इतिहास: साहित्यिक परिप्रेक्ष्य
सपना दुबे – पृ. 61–67
प्रगतिशील सामाजिक-साहित्यिक आन्दोलन का आरंभ
डॉ. प्रतिभा भारद्वाज – पृ. 68–71
‘रांझणा’ में स्त्री की दुनिया
आशीष कुमार – पृ. 72–76
‘आषाढ़ का एक दिन’ की प्रस्तुति में ओम शिवपुरी एवं रामगोपाल बजाज
डॉ. संजीब कुमार – पृ. 77–83
हिंदी–मणिपुरी कहानियों में चित्रित नैतिकता
नोंथोमबम गुणचुन्द्र सिंह – पृ. 84–96
दलित साहित्य के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ओमप्रकाश वाल्मीकि का संघर्ष
अखिलेश यादव एवं डॉ. सुरेन्द्र प्रताप सिंह यादव – पृ. 97–99
‘जंगली फूल’ में अभिव्यक्त आदिवासी समाजों की चेतना
डॉ. आशा सिंह – पृ. 100–104
राजी सेठ और विजया राजाध्यक्ष: एक तुलनात्मक विवेचन
मनिषा क. तावरे एवं डॉ. अमरजा अ. रेखी – पृ. 105–108
शैलीविज्ञान का सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य
अभिजीत कुमार मिश्रा – पृ. 109–115
‘शिकंजे का दर्द’ में सामाजिक यथार्थबोध का स्वरूप
उषा – पृ. 116–120
गीतिनाटकों में चित्रित समसामयिकता
सुनिता ब. पठारे एवं डॉ. अनिता वेताळ – पृ. 121–124
स्त्री का प्रतिरोध: चित्रा मुद्गल के उपन्यास ‘एक ज़मीन अपनी’ में
डॉ. रमीष एन. – पृ. 125–129
सामाजिक उत्तरदायित्व के विविध पक्ष
डॉ. धीरेन्द्र कुमार राय एवं हर्षित श्याम जायसवाल – पृ. 130–142
विदर्भ में पेशेवर सामाजिक कार्य शिक्षा: समस्याएँ और संभावनाएँ
डॉ. प्रशांत एन. शंभरकर – पृ. 143–148