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पदचिन्ह (जुलाई-दिसंबर, 2020)

वर्ष (Vol.) - 9, अंक (Issue) -2

अनुक्रमणिका

संपादकीय 

  1. बंगाल की लोक नृत्य परंपरा एवं स्वरूप
    नेहा झा एवं विष्णु कुमार – पृ. 05–12

  2. बाल कहानियों के बदलते क्षितिज
    डॉ. ईश्वर पवार – पृ. 13–18

  3. ‘जब आदिवासी गाता है’: आदिवासी समाज की सांस्कृतिक प्रतिध्वनि
    डॉ. अभिषेक कुमार यादव – पृ. 19–23

  4. The Celebration of Nature in the Fictional World
    Anita Alda – पृ. 24–28

  5. हिंदी कहानियों में अभिव्यक्त विकलांगों की दशा
    अमित कुमार चौबे – पृ. 29–33

  6. दहेज प्रथा एवं नारी जीवन: एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
    (हरिद्वार जिले के विशेष सन्दर्भ में)
    वंदना सिंह एवं डॉ. सुषमा नयाल – पृ. 34–44

  7. मुसहर समुदाय में समकालीन सामाजिक समस्याएँ
    चाँदनी – पृ. 45–53

  8. हिंदी उपन्यासों में वर्णित झारखंड के आदिवासियों का जीवन
    जीवेश कुमार झा – पृ. 54–56

  9. नई कहानी: विकास एवं संवेदना
    डॉ. बिनय कुमार सिन्हा – पृ. 57–60

  10. आदिवासी प्रतिरोध का प्रकृत इतिहास: साहित्यिक परिप्रेक्ष्य
    सपना दुबे – पृ. 61–67

  11. प्रगतिशील सामाजिक-साहित्यिक आन्दोलन का आरंभ
    डॉ. प्रतिभा भारद्वाज – पृ. 68–71

  12. ‘रांझणा’ में स्त्री की दुनिया
    आशीष कुमार – पृ. 72–76

  13. ‘आषाढ़ का एक दिन’ की प्रस्तुति में ओम शिवपुरी एवं रामगोपाल बजाज
    डॉ. संजीब कुमार – पृ. 77–83

  14. हिंदी–मणिपुरी कहानियों में चित्रित नैतिकता
    नोंथोमबम गुणचुन्द्र सिंह – पृ. 84–96

  15. दलित साहित्य के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ओमप्रकाश वाल्मीकि का संघर्ष
    अखिलेश यादव एवं डॉ. सुरेन्द्र प्रताप सिंह यादव – पृ. 97–99

  16. ‘जंगली फूल’ में अभिव्यक्त आदिवासी समाजों की चेतना
    डॉ. आशा सिंह – पृ. 100–104

  17. राजी सेठ और विजया राजाध्यक्ष: एक तुलनात्मक विवेचन
    मनिषा क. तावरे एवं डॉ. अमरजा अ. रेखी – पृ. 105–108

  18. शैलीविज्ञान का सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य
    अभिजीत कुमार मिश्रा – पृ. 109–115

  19. ‘शिकंजे का दर्द’ में सामाजिक यथार्थबोध का स्वरूप
    उषा – पृ. 116–120

  20. गीतिनाटकों में चित्रित समसामयिकता
    सुनिता ब. पठारे एवं डॉ. अनिता वेताळ – पृ. 121–124

  21. स्त्री का प्रतिरोध: चित्रा मुद्गल के उपन्यास ‘एक ज़मीन अपनी’ में
    डॉ. रमीष एन. – पृ. 125–129

  22. सामाजिक उत्तरदायित्व के विविध पक्ष
    डॉ. धीरेन्द्र कुमार राय एवं हर्षित श्याम जायसवाल – पृ. 130–142

  23. विदर्भ में पेशेवर सामाजिक कार्य शिक्षा: समस्याएँ और संभावनाएँ
    डॉ. प्रशांत एन. शंभरकर – पृ. 143–148